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सरकार ने कहा, इस्तीफा नहीं देंगे कानून मंत्री अश्विनी कुमार
कोयला घोटाले में सीबीआई की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिए जाने के बाद दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई। इसे लेकर यूपीए सरकार में बैठकों का दौर शुरू हो गया। विपक्ष की मांग पर सरकार ने साफ कर दिया कि कानून मंत्री इस मसले पर इस्तीफा नहीं देंगे। संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने ऐलान किया कि कानून मंत्री इस्तीफा नहीं देंगे। इस राजनीतिक सरगरमी के बीच सबसे पहले कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की। इस दौरान कानून मंत्री को बाहर इंतजार कर रही मीडिया का सामना करना पड़ा। कानून मंत्री मीडिया से बचने की कोशिश करते नजर आए। हालांकि बार-बार पूछे जाने के बाद उन्होंने इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। इसे लेकर यूपीए ने सहयोगी दलों के साथ बैठक की। इसमें शरद पवार, फारूख अब्दुल्ला और अजित सिंह को भी बुलाया गया। इस बैठक में कानून मंत्री अश्विनी कुमार भी उपस्थित थे। इसके अलावा बैठक में यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम, एनसीपी प्रमुख शरद पवार और अहमद पटेल मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नीत यूपीए सरकार सुप्रीम कोर्ट में 30 अप्रैल को होनेवाली सुनवाई का इंतजार कर रही है। इसके बाद ही किसी तरह का फैसला लिया जाएगा। फिलहाल सरकार ने अश्विनी कुमार के इस्तीफे से इनकार कर दिया है। टीएमसी सांसद सुखेंदु रॉय शेखर के मुताबिक हम पीएसी चेयरमैन से मांग करेंगे कि वो सीबीआई डायरेक्टर को समन करके पूरी जानकारी लें। उसके बाद आगे की नीति तय की जाए। अगर कानून मंत्री ही कानून तोड़ता है तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। सरकार तमाम जांच एजेसियों के माध्यम से घोटालों को दबाने की कोशिश कर रही है। वहीं कानून मंत्री अश्विनी कुमार का कहना है कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है। बीजेपी के प्रकाश जावड़ेकर का कहना है कि सीबीआई के हलफनामे से सरकार का वास्तविक चेहरा सामने आ गया है। इससे साफ पता चलता है कि यूपीए सरकार राजनीतिक कारणों के लिए सीबीआई का इस्तेमाल कर रही है। वहीं बीजेपी नेता राजीव प्रताप रूडी का कहना है कि सरकार ने सीबीआई रिपोर्ट में दखलअंदाजी की। कानून मंत्री ने पीएम को बचाने के लिए ऐसा किया। पीएम इस्तीफा दें। वहीं बीजेपी नेता जशवंत सिंह ने कहा कि अगर सीबीआ ने कहा है कि उसने रिपोर्ट कानून मंत्री से साझा की है तो इसकी जवाबदेही सीधे प्रधानमंत्री और कानून मंत्री की है।



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