सम्पादकीय मुख्य समाचार खेल समाचार क्षेत्रीय  समाज विज्ञापन दें अख़बार  डाऊनलोड करें
ऑनलाइन पढ़ें व्यापार  अंतरराष्ट्रीय  राजनीति कही-सुनी ब्यंग राशिफल
लाइफस्टाइल शिक्षा खाना - खजाना हिंदुस्तान की सैर फ़िल्मी रंग बताते आपका स्वभाव
| DAINIK INDIA DARPAN LIVE NEWS |MOTHER INDIA MONTHLY HINDI MAGAZINE | GIL ONLINE LIVE NEWS | DID TV POLITICAL, CRIME ,SOCIAL, ENTERTAINMENT VIDEOS| ... 
  • दिनांक
  • महिना
  • वर्ष

गुजरात को 59 हजार करोड़ रुपये वार्षिक योजना व्‍यय को मंजूरी
नयी दिल्ली: गुजरात के लिए वर्ष 2013-14 के 59 हजार करोड़ रुपये के वार्षिक योजना व्‍यय को मंजूरी दी गई। योजना आयोग के उपा‍ध्‍यक्ष श्री मोंटेक सिंह अहलुवालिया और गुजरात के मुख्‍यमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के बीच हुई बैठक में इस पर निर्णय लिया गया। 59 हजार करोड़ रुपये के योजना परिव्‍यय में राज्‍य की योजना के लिए लगभग 3979 करोड़ रुपये की केन्‍द्रीय सहायता शामिल है। इसके अलावा, विभिन्‍न केन्‍द्र प्रायोजित योजनाओं के माध्‍यम से भी लगभग 6 हजार करोड़ रुपये केन्‍द्र सरकार की ओर से गुजरात में पहुंचने की संभावना है। इस तरह 2013-14 के दौरान सभी स्रोतों से केन्‍द्र सरकार द्वारा योजना फंड में उसे लगभग 10 हजार करोड़ रुपये प्राप्‍त होने की संभावना है। योजना आयोग ने कहा कि राज्‍य देश में सबसे तेज गति से विकास कर रहे राज्‍यों में शामिल है। आयोग ने इस बात को भी सामने रखा कि‍ 11वीं योजना के दौरान राज्‍य में कृषि और संबंधित गतिविधियों में विकास का औसत प्रदर्शन पूरे देश द्वारा हासिल की गई उपलब्धि से अधिक रही है, लेकिन दसवीं योजना काल में कृषि क्षेत्र में दर्ज किये गये उच्च‍ विकास दर से इसमें गिरावट आई है। आयोग ने समावेशी विकास के लिए कृषि के क्षेत्र में विकास के महत्‍व पर जोर दिया। राज्‍य सरकार ने संकेत दिया कि कृषि क्षेत्र में विकास की पहल के दूसरे चरण की उसकी योजना है, जिसमें प्रारंभ से अंत तक की सुविधाएं स्‍थापित करना और पशुपालन पर ज्‍यादा जोर शामिल है। बातचीत के क्रम में योजना आयोग ने सामाजिक क्षेत्र में गुजरात के प्रदर्शन की ओर ध्‍यान आकर्षित किया, जो राज्‍य में उच्‍च विकास दर हासिल किये जाने से उम्‍मीद की अपेक्षा काफी कम है। इनमें खासतौर पर बाल लिंग अनुपात का स्‍तर, बाल शिशु मृत्‍यु दर, मातृत्‍व मृत्‍यु दर और कुपोषण शामिल है। वर्ष 2001 से 2011 के बीच राज्‍य में बाल लिंग अनुपात में सुधार हो रहा था, लेकिन राज्‍य के लगभग आधे से अधिक जिलों में यह खराब स्‍तर पर पहुंचने के कारण अंत में इसमें गिरावट दर्ज की गई। कुपोषण के मामले में प्रमाणों से पता चलता है कि आर्थिक तौर पर विकास कर रहे राज्‍य में कुपोषण का स्तर काफी अधिक है। राज्‍य सरकार ने सामाजिक क्षेत्र के विकास के प्रति योजना आयोग की चिंताओं से स‍हमति जताई और इस स्थिति में सुधार संबंधी अपनी पहल का ब्‍यौरा दिया।



Share This -->

 


 





फोटो गैलरी                       More..
              

     

Video                                More..

https://www.youtube.com/watch?v=jzRWPYTTyac