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श्रीनगर पहुंचे प्रधानमंत्री व सोनिया ने सेना और कश्मीरियत को सराहा
श्रीनगर| प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को कश्मीरियत और सेना के काफिले पर हुए हमले में शहीद जवानों की सराहना की। चार महीने पहले अफजल गुरु को दी गई विवादित फांसी के बाद पहली बार संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ प्रधानमंत्री मंगलवार को जम्मू एवं कश्मीर की दो दिवसीय यात्रा पर यहां पहुंचे। एक दिन पहले सेना के काफिले पर हुए हमले में आठ जवानों के शहीद हो जाने से श्रीनगर का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। इस यात्रा का उद्देश्य राज्य में आर्थिक विकास पर गौर करने तथा कश्मीर और जम्मू क्षेत्र के बीच एक महत्वपूर्ण रेल संपर्क शुरू करने पर केंद्रित है, लेकिन सोमवार के हमले से यात्रा का रंग फीका पड़ गया है। मनमोहन और सोनिया, दोनों ने अपनी यात्रा के पहले दिन जम्मू क्षेत्र के किश्तवाड़ में एक जनसभा को संबोधित किया। इसके बाद मनमोहन और सोनिया श्रीनगर चले गए, जहां उन्होंने सोमवार को हुए हमले में घायल जवानों से मुलाकात की। मनमोहन सिंह ने उर्दू में किए गए संबोधन में कश्मीरियत की सराहना की और सांप्रदायिक सौहाद्र की वकालत की। प्रधानमंत्री ने 20वीं सदी के कश्मीरी कवि महजूर के सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट जारी करते हुए कहा कि सिर्फ अपनी भौगोलिक खूबसूरती के लिए ही नहीं बल्कि कश्मीर को धरती के स्वर्ग के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा, महान आध्यात्मिक शख्सियतों ने कश्मीर को अपने शाश्वत मूल्यों को आगे बढ़ाकर कश्मीर को खूबसूरत बनाया। मनमोहन सिंह ने कहा लल्ला अरिफा या लाल्लाश्वारी और शेख नुरुद्दीन वली को कश्मीर की आत्मा और कश्मीरियत की ताकत करार दिया। उन्होंने कहा, यदि मैं यह कहूं कि कश्मीर का दिल इन दो महान शख्सियतों के साथ धड़कता है तो मैं गलत नहीं कहा जाऊंगा।मैं उन मूल्यों को सलाम करता हूं जिसके लिए कश्मीर हमेशा खड़ा रहा है और उसे बनाए रखेगा। हिंदी में संबोधित करते हुए सोनिया गांधी ने महजूर को एक महान समाज सुधारक बताया। उन्होंने कहा, वे अपने संदेशों को आम आदमी के लिए बोधगम्य भाषा में रखने में समर्थ थे और यही कारण है कि रवींद्रनाथ टैगोर ने उन्हें कश्मीर का वर्डसवर्थ कहा था। उधमपुर में उतरने के बाद दोनों नेताओं को एमआई-17 हेलीकॉप्टर से जम्मू से 200 किलोमीटर दूर किश्तवाड़ पहुंचाया गया। किश्तवाड़ में प्रधानमंत्री ने 850 मेगावाट क्षमता की जल विद्युत परियोजना की आधारशिला रखी। यहां उन्होंने एक दिन पहले श्रीनगर में हुए आतंकवादी हमले में शहीद हुए आठ जवानों को श्रद्धांजलि दी। यह कहते हुए कि आतंकवादी कश्मीर में अपने मकसद में कभी कामयाब नहीं होंगे, मनमोहन सिंह ने किश्तवाड़ की जनसभा में कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में देश एकजुट है। किश्तवाड़ स्टेडियम में आयोजित सभा में सैंकड़ों लोग मौजूद थे। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यदि केंद्र में कांग्रेस नेतृत्व वाली संप्रग सरकार नहीं होती, तो जम्मू एवं कश्मीर को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा होता। किश्तवाड़ से दोनों नेता उधमपुर के रास्ते श्रीनगर रवाना हुए। सबसे पहले वे सोमवार को हमले में घायल हुए जवानों का हालचाल लिया। घायल जवानों का इलाज बादामी बाग छावनी में किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने जवानों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। दोनों नेता इससे पहले 28 अक्टूबर 2009 को राज्य के दौरे पर आए थे। उस समय कश्मीर घाटी का रेल संपर्क वानपोह स्टेशन से दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित काजीगुंड तक विस्तृत किया गया था। मनमोहन सिंह वर्ष 2010 में भी दो दिनों की यात्रा पर आए थे। मंगलवार की रात श्रीनगर में बिताने के बाद प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष कश्मीर घाटी को जम्मू क्षेत्र से जोड़ने वाली 10.6 किलोमीटर लंबी रेल सुरंग का उद्घाटन करेंगी।



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