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इशरत जहां केस : सीबीआई की पहली चार्जशीट में IB अफसर का नाम नहीं?
इशरत जहां मुठभेड़ मामले में सीबीआई आज अहमदाबाद स्थित विशेष अदालत में आरोप-पत्र दायर करने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, पहले आरोप पत्र में सिर्फ उन पुलिसवालों के नाम होंगे, जो मुठभेड़ के वक्त मौके पर मौजूद थे। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई के पहले आरोप पत्र में आईबी अधिकारी राजेंद्र कुमार का भी नाम नहीं होगा, लेकिन माना जा रहा है कि सीबीआई की फाइनल रिपोर्ट में उनका नाम हो सकता है। आखिरी रिपोर्ट में सीबीआई दावा कर सकती है कि इशरत एवं तीन अन्य लोगों को गुजरात की अपराध शाखा द्वारा मुठभेड़ में मार गिराने से पहले आईबी ने उनसे पूछताछ की थी। आरोप-पत्र दाखिल करते समय सीबीआई इस मामले में साजिश के कोण की जांच के लिए और वक्त मांग सकती है। गौरतलब है कि नौ साल के बाद सीबीआई इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले में चार्जशीट दायर करने जा रही है। दरअसल, 15 जून 2004 को अहमदाबाद के नरोदा इलाके में इशरत और उसके तीन दोस्तों को पुलिस ने मार गिराया था। गुजरात पुलिस का दावा था कि ये चारों मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के इरादे से आए थे और वह मुठभेड़ में मारे गए थे। मुठभेड़ में 19 साल की इशरत के अलावा जावेद शेख उर्फ प्राणेश पिल्लई, अमजद अली राणा और जीशान जौहर को भी मौत के घाट उतारा गया था। सीबीआई यह साबित करने की कोशिश में भी जुटी है कि यह फर्जी मुठभेड़ थी और इसकी जानकारी मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके करीबी अमित शाह को थी। सीबीआई का दावा है कि उनके पास पुलिस के कुछ ऐसे गवाह भी हैं, जिनके पास रिकॉर्डिंग है, जिसमें डीजी बंजारा ने आईबी अधिकारी राजेंद्र कुमार को इशारों में इस बात की जानकारी दी थी। गुजरात हाईकोर्ट ने इशरत जहां मुठभेड़ की जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआई ने इस मामले के एक आरोपी को सरकारी गवाह बनाने में कामयाबी हासिल कर ली। इस गवाह ने 1979 बैच के आईपीएस अधिकारी राजेंद्र कुमार का नाम लिया, जो मुठभेड़ के वक्त अहमदाबाद में आईबी के संयुक्त निदेशक के पद पर तैनात थे। सूत्रों ने इससे इनकार किया कि राजेंद्र कुमार पर मुकदमा चलाने के लिए सीबीआई को किसी तरह की इजाजत लेने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इस मामले में उनकी भूमिका की और जांच की जा रही है और उन्हें पूछताछ के लिए फिर बुलाया जा सकता है। राजेंद्र कुमार 31 जुलाई को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) से रिटायर हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान सीबीआई को संकेत मिले कि राजेंद्र कुमार की भूमिका सिर्फ खुफिया जानकारी देने तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि मुठभेड़ में भी उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई। गुजरात हाईकोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने इस मुठभेड़ को फर्जी घोषित किया था और एक मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने मामले की तफ्तीश की थी।



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