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टूटी सूरज पंचोली की चुप्पी, कहा- जिया के साथ थे शारीरिक संबंध
जिया खान की खुदकुशी के बाद पहली बार उनके ब्वॉयफ्रेंड सूरज पंचोली ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. सूरज पंचोली ने बताया कि वह किस तरह जिया खान से मिले थे और कैसे दोनों के बीच प्यार शुरू हुआ था. जिया खान ने 3 जून 2013 को खुदकुशी कर ली थी, जिसके बाद सूरज को जेल भी जाना पड़ा था. जिया खान का असली नाम नफीसा रिजवी खान था. सूरज पंचोली ने बताया कि वो नफीसा खान से फेसबुक के जरिए मिले थे. उन्होंने कहा कि नफीसा बहुत अच्छी इंसान थीं. जिया केयरिंग और शांत रहने वाली लड़की थी, जो छोटी-छोटी बातों से खुश हो जाया करती थी. लेकिन वह बहुत पजेसिव भी थी. हम दो बार डिनर पर साथ गए उसके एक हफ्ते बाद उसने मुझे मेसज किया था, सूरज, मुझे तुम्हारी जरूरत है. मेरे हाथ से खून बह रहा है, क्या तुम आ सकते हो? मैं टाउन में था और वो सागर संगीत जूहू में रहती थी जो मेरे घर से 3 मिनट की दूरी पर था, मैंने अपने स्टाफ को रात में 11:30 बजे उसके घर भेजा. वो दरवाजा खोलते ही बेहोश हो गई. कोहनी के पास उसने अपने हाथ को काट लिया था. करीब 3 इंच का घाव था वो. मैं उस समय 21 साल का था. जब मैं वहां पहुंचा तो डॉक्टर ने घाव पर स्टिच लगा दिए थे और उसे ड्रिप लगी हुई थी. मैं उसके साथ था लेकिन उसने मुझसे बात नहीं की थी. कुछ दिनों के बाद मैंने उसकी मां को लंदन में फोन किया और अपना परिचय दिया. मैंने उन्हें बताया, आंटी, नफीसा डिप्रेशन में है और उसे देखभाल के लिए और साथ रहने के लिए आपकी और अपनी बहन की जरूरत है. मैं उससे महज दो बार मिला हूं और उसने मुझे कॉल किया. उसकी मां ने मुझसे कहा था, बेटा, मैं दो महीने में आ जाऊंगी. लेकिन प्लीज उसका ध्यान रखना. लेकिन उन्हें आने में 4 महीने लग गए. इन चार महीनों में मुझे नफीसा से प्यार हो गया. मैं खुद को उससे रिलेट कर पाता था. मैं भी उसे पसंद करता था और अकेले रहता था. मैं उसकी कंडीशन को समझ पा रहा था. उसने मुझे बताती थी कि कैसे काम नहीं मिलने से वो डिप्रेस हो रही थी, उसके परिवार से उसके संबंध अच्छे नहीं थे, उसके पिता उसे छोड़ चुके थे और उसने खुद को अपने दम पर खड़ा किया था. उसने मुझे बताया था कि उसके एक्स ब्वॉयफ्रेंड्स उसे गालियां देते थे. इतना ही नहीं उसने मुझे बताया था कि जब वह 14 साल की थी तो लंदन में एक आदमी ने उसका रेप भी किया था. नफीसा ने मुझे ये भी बताया था कि एक समय ऐसी हालत थी कि उसे दिन में बस एक टाइम खाना नसीब होता था. ये सब सुनने के बाद उसके लिए मेरा प्यार और बढ़ गया था. नफीसा को अपने परिवार से और प्यार की साथ ही आस पास के लोगों से रिस्पेक्ट की जरूरत थी. मैं ऐसा नहीं कर सका. हालांकि एक 21 साल का लड़का जो भी कर सकता था उससे ज्यादा ही मैंने किया. वो हर रात को रोती थी. मैं जबसे उसकी जिंदगी में आया था वो अकेली नहीं रह सकती थी. वो अक्सर मेरे घर आ जाया करती थी. नफीसा की सेक्सी इमेज के चलते शुरुआत में पापा को इस तरह से उसका आना पसंद नहीं था, लेकिन जब मैंने उन्हें उससे मिलवाया तो उन्हें नफीसा के घर आने से कोई दिक्कत नहीं थी. अपनी फिल्म के लिए मैं सुबह 8 बजे से शाम को 8 बजे तक कई क्लास अटेंड करता था, लेकिन उसे मेरे ऊपर पूरा विश्वास नहीं था हालांकि मुझे उस पर पूरा भरोसा था. मैं कभी कभी अपने सर से उसकी बात कराता था और उसको विश्वास दिलाता था कि मैं क्लास में ही हूं. एक समय ऐसा आ गया था कि वो मेरे साथ मेरी क्लास में भी जाया करती थी, मुझे इससे भी कोई दिक्कत नहीं थी. एक दिन मैं इसके साथ बैठा और कहा, नफीसा, तुम जानती हो कि मैं एक भारतीय लड़का हूं. मैं अपने परिवार में बहुत कुछ देख चुका हूं. मैं तुम्हारा ध्यान रखने की पूरी कोशिश कर रहा हूं. तुम रोज मेरे सामने रोती हो. मैं तुमसे 4 साल छोटा हूं. तुमने मुझे अपने बारे में जो कुछ भी बताया है उसके बावजूद मैं तुमसे प्यार करता हूं. तुम मेरा विश्वास करना शुरू करो. मैं अपने मां-बाप और बहन से ज्यादा तुमसे प्यार करता हूं. अगर मैं तुमसे 3 दिन ना मिलूं तो मेरा प्यार तुम्हारे लिए सिर्फ बढ़ेगा. 7 महीने में 3 रातों को छोड़कर वो हर रात रोई है. उसका और मेरा जन्मदिन मनाने के लिए एक बार हम गोवा गए थे. उसके साथ डिप्रेशन की प्रॉब्लम थी और वो काउंसलिंग भी करा चुकी थी. उसने मुझे बताया कि इससे पहले भी वह फांसी लगाने की कोशिश कर चुकी है. मैं अभी भी उसकी मां की इज्जत करता हूं. काश मैं उनसे पूछ सकता कि क्या उन्हें सच में ऐसा लगता है कि मैंने नफीसा के साथ कुछ गलत किया. एक दिन उसने मुझे बताया था, सूरज, मुझे पीरियड नहीं हो रहे हैं. क्या हम डॉक्टर के पास चल सकते हैं? हम डॉक्टर के पास गए और उसने नफीसा को एक गोली दी और कहा कि इससे सब सही हो जाएगा. हम वापस घर गए और सब कुछ नॉर्मल था. जब पुलिस ने उसके फैमिली डॉक्टर से पूछा कि क्या अबॉर्शन के समय मैं वहां था तो डॉक्टर ने मना कर दिया. पुलिस ने मुझसे पूछा और मैंने कहा, सर, हमारे बीच शारीरिक संबंध थे. उसने मुझे अपनी प्रेगनेंसी के बारे में नहीं बताया था. अगर ये साबित हो जाता कि ये मेरा है मैं इसे अपना लेता. वरना ये मेरा नहीं है, इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता. नफीसा की मौत से एक महीने पहले वो मेरे घर पर सुबह 8 बजे रोते हुए आई थी. उसने मुझसे कहा, मेरा मेरी मां से झगड़ा हुआ है. उसके हाथ पर चोट के निशान थे. मैंने उसे अपने दोस्त करन के साथ छोड़ा और उसे बताए बिना उसकी मां से मिलने गया. मैंने उसकी मां से पूछा, आंटी, क्या आपका नफीसा से झगड़ा हुआ है? क्या आपने उसे मारा है? उन्होंने मुझसे कहा, नहीं, मैंने अपनी बेटी को कभी नहीं मारा. मैंने नफीसा की मां से कहा कि मैं उन दोनों के बीच में आने वाला कोई नहीं लेकिन बस उनको बताना चाहता हूं कि उनकी बेटी की हालत ठीक नहीं है और उसे मेडिकल असिस्टेंस और उनकी मदद की जरूरत है. मैं अपनी तरफ से उसकी मदद करने की पूरी कोशिश कर रहा था. उसकी मां ने मुझे कहा था, बेटा, वो ऐसा बस अटेंशन पाने के लिए करती है. यहां आने के लिए शुक्रिया. उसके एक्स ब्वॉयफ्रेंड्स भी उसे छोड़कर चले गए थे लेकिन वो खुदकुशी नहीं करेगी. वो ऐसा 11 साल की उम्र से करती आ रही है, मैंने नफीसा से कहा कि मैं उसकी मां से मिला. वो अपने घर गई और उसकी मां के नंबर से मेरे पास एक मेसेज आया, जिसमें लिखा था, सूरज, मैं नहीं चाहती कि तुम मेरी बेटी के साथ रहो. मैं नहीं चाहता था कि मेरी वजह से नफीसा और उसकी मां के बीच कोई दूरियां आए. इसके अलावा मैं नफीसा के रोज के रोने से तंग आ चुका था. मैंने उसको बोला कि मैं अब और ये सब नहीं झेल पाऊंगा और उसके साथ बातचीत कम कर दी. उसकी खुदकुशी से 20 दिन पहले हमारे बीच बातचीत बहुत कम हो गई थी. उसने सोमवार (3 जून) को खुदकुशी से पहले शनिवार (1 जून) को मुझे कॉल किया था और कहा था, मैं हैदराबाद जा रही हूं. वहां मुझे एक फिल्म मिल रही है. मैं उससे पहले रविवार तुम्हारे साथ बिताना चाहती हूं. मैंने उसे कहा कि ठीक है, लेकिन मैं फिर से जुदाई का दर्द नहीं झेलना चाहता था, इसलिए ये रविवार हमारा साथ आखिरी रविवार होगा. मैंने सोमवार सुबह उसे एक बुके भेजा. जिस पर लिखा हुआ था, All the best. उसने मुझे सोमवार की शाम फिर कॉल किया और कहा, मैं तुमसे मिलना चाहती हूं. मैंने कहा, मैं तुमसे नहीं मिल सकता हूं. और मैंने उसे मेसेज किया, नफीसा, ऐसा नहीं करते हैं. और मैंने अपना फोन ऑफ कर दिया. वो आखिरी बार था जब मैंने उससे बात की थी. 2 घंटे बाद मेरे पापा ने मुझे उसके सुसाइड के बारे में बताया. जब नफीसा की मौत हुई तो पापा मुझसे ज्यादा रोए थे. उन्हें लग रहा था कि वो उसकी और मदद कर सकते थे. उन्हें नफीसा की सारी तकलीफों के बारे में पता था. उसकी मौत मेरे लिए शॉक नहीं थी लेकिन उसकी बिल्डिंग में घुसते ही मुझे रोना आ गया था, मैं वहीं उसे लेने जाया करता था. मैं अभी भी उसे याद करता हूं. मेरे घर में हर चीज उसकी याद दिलाती है. वो अंदर और बाहर दोनों तरह से खूबसूरत थी. उसे अपनी जिंदगी में अच्छी चीजों के आने के लिए इंतजार करना चाहिए था. उसने सही नहीं किया कि वो मुझे इस तरह से छोड़कर चली गई. मैं उसकी मदद नहीं कर पाया. मेरी जिंदगी में एक बदलाव आया है कि मेरा अपने मां-बाप और बहन के लिए प्यार और बढ़ गया है. मैं हमेशा से शांत इंसान रहा हूं लेकिन अब मेरे अंदर अगर 5 परसेंट गुस्सा था तो वो भी अब खत्म हो गया है. मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं कि मेरा नाम उसके साथ जिंदगी भर जोड़ा जाएगा. मैं आज भी उससे प्यार करता हूं.



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